भारत में महगाई खुजली की तरह बढ़ रही है ,जो बढती ही जाती है .गरीब बेचारा क्या करेगा ? यह कहना ठीक नहीं है क्योकि अब तो सभी गरीब हो ही जायेगें "गरीब प्रधान देश "नया नाम सोच लिया है. आम आदमी गुटली की तरह फ़ेंक दिया जायेगा किसी को पता भी नहीं चलेगा । विकास के काम हो रहे है कागज़ पर , रास्ते में गड्डे खोदे जा रहे है और सरकार खुद हवाई जहाज में सभी के दुरदर्सन कर रही है .मिटटी का तेल आसमान छूती महगाई से भभक रहा है ,आम आदमी के पास न गैस हे ,ना दाल-चावल , बच्चो को पढ़ाएंगे की खिलाएंगे ,ठेलियां भर कर पैसा लेके जाओ तो मुट्ठी भरकर राशन आता है .मिडिया वाले अगर किसी का साक्षात्कार भी महगाई के बारे में दिखाते है तो ऐसे जो आसानी से खरीद कर अपना परिवार पालते हो ,अच्छे घर में रहते हो ऐसे समाचार से सरकार को क्या सन्देश दे रहे है ? महगाई का ये भुत सबको मार डालेगा ?क्या इसका कोई उपाई मिला नहीं ? या गायब कर दिया ? "वैष्णव जन तो तेने रे कहिये जो पीड पराई जाने रे" -अब यही गाना--------
केवल दूसरों को जो पीड़ा देगा वही मानुष बन गया रे ! ---हाय ये महगाई --तू आई तो बन गया नया अफसाना --क्यों करे ? परेशान ! सबको । जीना हुआ बेहाल इन्सान का अब कोई बचाओ जालिम महगाई से भाई थक गए सारे!
Saturday, July 3, 2010
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment