Sunday, April 18, 2010
स्त्री
घर और बाहर का लम्बा सफ़र करते स्त्री के जीवन में काफी बदलाव आया है ,अपनी कमाई से परिवार को आर्थिक सहारा दे रही है ,यानि वह दोहरा जीवन व्यतीत कर रही है ,दफ्तर में चाहे वह कितना महत्वपूर्ण कार्य करके आने के बाद भी उसकी उपेक्षा होती है,ऑफिस में भी मानसिक एवं शरीरिक शोषण होता है । कामकाजी महिलाये घर और बाहर दोनों जगह सामंजस्य बिठाने का प्रयाश करती दिखाई देती है । लड़ाई अभी कहाँ ख़तम हुई है । जब स्त्री के कार्य का हिस्सा गिना जायेगा ,तब मानसिक रूप से सफल एवं सार्थक हो सकता है ।
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